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पहला दिन (शुरुआत फिर से )

आज काफी दिनों बाद फिर से आईएस की तैयारी का मन कर रहा है |

कारण एक अजीब सी घुटन महसूस हो रही है | वास्तव में क्या है ये मुझे खुद नहीं पता मैं आंशिक रूप से खोजने 

की कोशिश करूंगा |

कुछ करने की इच्छा हो रही है देश के प्रति समाज के प्रति एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खड़ी करना और उसको 

सफल बनाना भी कम रोमांचक कार्य नहीं है | आगे का भी नहीं पता कब तक तैयारी का मूड रहेगा हो सकता है की

अभी सो जाऊं और कल सबेरे ही मूड अलग हो | देखते हैं क्या चल रहा दिमाग में क्या करेंगे आगे कुछ पता नहीं |

किसी ने सही ही कहा है अगर अपना भविष्य सुधारना हो तो अपना वर्तमान सही कर लेना चाहिए |

लेकिन उपदेश देने वालों ने कोई गाईड लाईन  या मानक नहीं बनाया है जिससे की हम मापन कर सके कि हम जो 

वर्तमान में कर रहे वह सही है या गलत | सिर्फ सही या गलत के पैमाने पर आंकना भी गलत है बहुत सारी 

संभावनाएं और कार्य हो सकते है जीवन में  शायद किसी को भी कुछ भी पता नहीं होता | 

मुझे 7 साल हो गए अध्यापन कार्य करते  हुए बच्चों को बड़ी बड़ी बातें बताते हैं उन्हें मोटिवेट करते हैं बहुत सारी 

बातें खुद हम पर भी लागू होती हैं |

बचपन में अजीब सा जूनून हुआ करता था जो ठान लेते थे उसके प्रति पुरे समर्पण भाव से लग जाते थे |
 
सफलता असफलता की चिंता किये बिना बस लगे रहते थे शायद यही कारण था की सफल होते रहे मन चाहा  

सब  रास्तें मिलते चले जाते थे  |

अब जिन्दगी में अजीब सी बातें होने लगी है कारण बड़ा आसन है वो जूनून और जज्बा नहीं रहा है अभी तो उम्र ३० 

की पुरी भी नहीं हुयी और अभी से ऐसी हालत ऐसी सोच  |

छी छी 

कुछ करना पडेगा |

सबसे पहले अपनी दिनचर्या सुधारनी होगी |

आज  २३ अगस्त २०२० दिन रविवार हो गया है रात के २ बज रहे हैं|

नींद नहीं आ रही है  क्यों नहीं आ रही कारण नहीं पता लेकिन इतने दिनों के कार्य के बाद बहुत मसक्कत करनी 

पड़ी है  जिन्दगी में  अभी कोरोना काल की छुट्टियां भी चल ही रही है इन छुट्टियों का ही परिणाम कह सकते हैं की 

इतना विचार करने का वक्त मिला है 

वर्ना कहा इतना समय मिलता की अपने बारें में सोंचे दिन भर इधर उधर भागना 

दौड़ना फिर शाम को थक हार कर खा पीकर सो जाना

 फिर अगले दिन की मजूरी में फिर से लग जाना | 

मजूरी

हाहाहा 

मजूरी ही कहेंगे 

कहने को संस्थान के मालिक है हम लोग लेकिन 

हर काम खुद देखना पड़ता है करना पड़ता है|

ये भी अपने आप में एक अलग ही मजा है |

बड़ा साइज़ होनी के बाद बहुत सारे लेवल पे बातें शुरु हो जाने के बाद शायद 

जमीनी स्तर पर इतना कार्य करने का अवसर जीवन में फिर ना मिले 



अरे कहा कहा की बातें करने लगे 

भावनाओ में कुछ ज्यादा ही बह गए 

चलो अब थोड़ा पढाई शुरू की जाये|


बाकी की छोटी मोटी बातें हमलोग आगे करते रहेंगे |


आज का प्लान :

1- सिलेबस को अच्छी तरह से पढ़ना और समझना 

२- एक समय सारणी तैयार करना और उसका क्रियान्वयन करना 


 

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